३१ जनवरी २०२७ से दुबे खैरा (खैरादीप) गाँव में सात दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन श्रीवैष्णव जगत के आचार्य परम पूज्य जगद्गुरु श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के शिष्य, परम पूज्य श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के दिव्य मंगलानुशासन में होगा।
दुबे खैरा, जिसे खैरादीप के नाम से भी जाना जाता है, बिहार के औरंगाबाद ज़िले में दाउदनगर की बेलवां पंचायत का गाँव है। खेती, आस्था और सामुदायिक जीवन इसकी पहचान के आधार हैं।
बिहारऔरंगाबाददाउदनगरदुबे खैरा / खैरादीप
तीन सदियाँकरीब तीन सदियों की बसावट, स्थानीय परंपरा के अनुसार
पूर्वांचल से जुड़े मूल
स्थानीय परंपरा के अनुसार करीब तीन सदियों पहले श्री गंगा दुबे सहित गाँव के पूर्वज उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र से यहाँ आकर बसे।
गाँव की कान्यकुब्ज कृषक विरासत में पीढ़ियों के उस श्रम की स्मृति है, जिसने पथरीली, कठिन जमीन को कृषि योग्य बनाया।
उपासना और ग्राम जीवन
सनातन परंपरा का स्थानीय केंद्र
आयोजक के विवरण में दो ठाकुरबाड़ी मंदिर, देवी स्थान, हनुमान मंदिर और शिव मंदिर गाँव के धार्मिक जीवन का हिस्सा हैं। स्कूल, अस्पताल और सामूहिक आयोजन भी ग्राम जीवन की साझा पहचान में शामिल हैं।
भक्ति और सहभागिता
रामभक्ति की दीर्घ परंपरा
गाँव की मौखिक परंपरा में श्रीराम के प्रति भक्ति का लंबे समय से विशेष स्थान रहा है। आयोजक राम जन्मभूमि आंदोलन में ग्रामवासियों के महत्वपूर्ण योगदान का भी उल्लेख करते हैं; यह समुदाय की स्मृति में सुरक्षित इतिहास का हिस्सा है।
इस विरासत की एक विशिष्ट कड़ी: श्री महाविष्णु यज्ञ समिति, दुबे खैरा ने श्रीवचनभूषणम् पर श्रीवैष्णव जगद्गुरु श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के चिन्तामणि भाष्य का प्रकाशन किया।
स्थानीय इतिहास और ग्राम की मौखिक परंपरा पर आधारित। पुराने विवरणों में लगभग २,२८४ बीघे कृषि-क्षेत्र का उल्लेख है; यह वर्तमान ग्राम-सीमा या भूमि-स्वामित्व का अभिलेख नहीं है।
गाँव के देवस्थान
ग्राम जीवन में आस्था के केंद्र
गाँव के पूज्य देवस्थान और मंदिर, ग्रामवासियों की आस्था के केंद्र।
ठाकुर जीठाकुर जीदेवी स्थानहनुमान जी
ठाकुरबाड़ीजोड़ा मंदिर
०२यज्ञ-परंपरा
पीढ़ियों से चली आ रही यज्ञ-परंपरा
संजोई हुई स्मृति। परंपरा का नया अध्याय।
पूर्व आयोजन की स्मृति
श्री महाविष्णु यज्ञ
जनवरी १९९५ में भारत के महान मनीषी एवं जगद्गुरु परम पूज्य श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के पावन सान्निध्य में दुबे खैरा ने श्री महाविष्णु यज्ञ का आयोजन किया था। वह समागम आज भी गाँव की साझा धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ
परम पूज्य श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज दुबे खैरा पधारे और गाँव में सात दिवसीय ज्ञान यज्ञ सम्पन्न हुआ।
श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ
श्री महाविष्णु यज्ञ के बत्तीस वर्ष बाद गाँव एक बार फिर उसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट हो रहा है। ३१ जनवरी २०२७ से पूज्य श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के दिव्य मंगलानुशासन में सात दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ होगा। आस्था, सेवा और सामूहिक सहभागिता के साथ ग्रामवासी और श्रद्धालु इस आयोजन में फिर साथ आएँगे।
श्रीवचनभूषणम् · मूल डिजिटल प्रति का शीर्षक-पृष्ठ
प्रकाशित अभिलेख
ग्राम यज्ञ समिति का प्रकाशित अभिनन्दन
श्रीवचनभूषणम् के पृष्ठ ३७–३९ में औरंगाबाद के दूबे खैरा की यज्ञ समिति का अभिनन्दन मिलता है। उसमें श्री महाविष्णु यज्ञ का उल्लेख और पधारे स्वामी जी के प्रति कृतज्ञता है। पुस्तक का शीर्षक-पृष्ठ और नामांकित चित्र श्रीवैष्णव जगद्गुरु श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज की पहचान करते हैं।
इस भाष्य के प्रकाशक श्री महाविष्णु यज्ञ समिति, दुबे खैरा हैं। इसी अभिनन्दन-समूह के दिनांक-सूचक पद्य यज्ञ को जनवरी १९९५ में स्थापित करते हैं। शीर्षक-पृष्ठ पर अंकित मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी, संवत् २०५३ चौथे संस्करण का प्रकाशन-विवरण है; इसे यज्ञ की तिथि नहीं माना जाना चाहिए।
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०३गुरु-परंपरा
पूज्य स्वामीजी की दुबे खैरा पर कृपा
श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज से उनके शिष्य श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज तक, गुरु-कृपा की यह धारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी दुबे खैरा में बहती आ रही है। गाँव के अधिकांश परिवार इन्हीं दोनों संतों में से किसी एक के शिष्य हैं।
श्रीवैष्णव जगद्गुरु श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज
गुरु · चरित्रवन, बक्सर
श्रीवैष्णव जगद्गुरु श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज
आचार्य-नाम: श्रीमद् विष्वक्सेनाचार्य
वे श्रीरामानुजाचार्य की श्रीवैष्णव परंपरा के आचार्य थे। बक्सर का चरित्रवन उनकी साधना और धर्मप्रचार से गहराई से जुड़ा है। यज्ञ, शास्त्र-अध्ययन और उपदेश के माध्यम से उन्होंने बिहार तथा उत्तर प्रदेश के अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में वैष्णव परंपरा को आगे बढ़ाया। इस परंपरा में भगवान श्रीमन्नारायण की भक्ति, शरणागति और आचार्य के मार्गदर्शन का विशेष स्थान है।
उनकी साहित्यिक विरासत में उपनिषदों की ‘गूढार्थदीपिका’, श्रीवचनभूषणम् की ‘चिन्तामणि’ और वार्तामाला की ‘चूडामणि’ जैसी हिन्दी व्याख्याएँ शामिल हैं। ‘श्रीवैष्णवकृत्यदर्पण’ दैनिक वैष्णव आचार-उपासना का मार्गदर्शन देता है। ये कृतियाँ शास्त्रों के अर्थ और साधना-विधि को हिन्दी पाठकों तक पहुँचाती हैं।
दुबे खैरा से यह संबंध यज्ञ के साथ ग्रंथ-सेवा में भी दिखाई देता है: श्रीवचनभूषणम् के उपलब्ध संस्करण पर ग्राम की श्री महाविष्णु यज्ञ समिति का प्रकाशन-योगदान अंकित है। बक्सर के गंगातट पर उनका समाधि स्थल आज भी श्रद्धा और गुरु-स्मरण का केंद्र है।
श्रीवैष्णव जगद्गुरु श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के प्रत्यक्ष शिष्य
श्रीरामानुजाचार्य की गुरु-परंपरा में वे श्रीमद्भागवत कथा, सत्संग, चातुर्मास्य व्रत और श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति तथा सदाचरण की प्रेरणा देते हैं। उनके प्रवचनों में निष्कपट भक्ति, अहंकार का त्याग, माता-पिता का सम्मान और जीवन में धर्म के आचरण पर बल मिलता है।
गुरु की वाणी को पाठकों तक पहुँचाने में भी उनका योगदान है। ‘श्रीमद्भगवद्गीता-व्याख्यामृतसरिता’ के उपलब्ध संस्करण में वे प्रकाशक के रूप में उल्लिखित हैं; ग्रंथ का संपादन डॉ. सुदामा सिंह ने किया है। शाहपुर के श्री त्रिदंडी देव राजकीय डिग्री महाविद्यालय का संस्थागत परिचय भी शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान का उल्लेख करता है।
बक्सर के चरित्रवन में गुरु-स्मृति के आयोजनों से उनका गहरा जुड़ाव है। आयोजकों के अनुसार, ३१ जनवरी २०२७ से दुबे खैरा का सात दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ उनके दिव्य मंगलानुशासन में आयोजित होगा। दैनिक कार्यक्रम और अनुष्ठानों के समय पुष्टि के बाद साझा किए जाएँगे।
दुबे खैरा / खैरादीप में ३१ जनवरी २०२७ से सात दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का आयोजन पूज्य श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के दिव्य मंगलानुशासन में होगा। कार्यक्रम में वैदिक यज्ञ, धर्म सभा, प्रवचन और भारत के विभिन्न क्षेत्रों से संतों का समागम सम्मिलित होगा।
०१
वैदिक यज्ञ
महायज्ञ के वैदिक अनुष्ठान
०२
धर्म सभा
धर्म-विचार और उपदेश का आयोजन
०३
प्रवचन
आयोजन के दौरान आध्यात्मिक प्रवचन
०४
संत समागम
भारत के विभिन्न क्षेत्रों से संतों का आगमन
सात दिनों का कार्यक्रम
आरम्भ ३१ जनवरी २०२७ · दिनवार समय की घोषणा शेष है
०१पहला दिन
०२दूसरा दिन
०३तीसरा दिन
०४चौथा दिन
०५पाँचवाँ दिन
०६छठा दिन
०७सातवाँ दिन
कार्यक्रम की सूचना
आयोजक ने ३१ जनवरी २०२७ की आरम्भ-तिथि, सात दिवसीय अवधि और कार्यक्रम के प्रमुख अंगों की पुष्टि की है। दिनवार समय, संतों की नामवार उपस्थिति और आगंतुक व्यवस्था की जानकारी पुष्टि के बाद प्रकाशित होगी।
आयोजन से जुड़ें
महायज्ञ में आने की इच्छा है?
अपनी रुचि दर्ज कराएँ, ताकि आयोजक महायज्ञ की महत्वपूर्ण जानकारी आप तक पहुँचा सकें। यह यात्रा, आवास या स्थान का आरक्षण नहीं है।
आपका नाम, फ़ोन नंबर और दिए गए वैकल्पिक स्थान-विवरण निजी संपर्क-सूची में रखे जाएँगे। ये वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से नहीं दिखेंगे। कृपया अपना या परिवार के वयस्क संपर्क व्यक्ति का विवरण दें।
०५ग्रंथ संग्रह
परंपरा के ग्रंथ
श्रीवैष्णव जगद्गुरु श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज और गुरु-परंपरा से जुड़े उपलब्ध संस्करण तथा डिजिटल अध्ययन-साधन।
नौ ग्रंथों का श्रेय सत्यापित किया गया है। टीका-ग्रंथों में श्रेय श्रीवैष्णव जगद्गुरु श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के भाष्य अथवा योगदान का है, प्राचीन मूल शास्त्र की रचना का नहीं। यह चयनित संग्रह है, संपूर्ण रचनावली नहीं।
पूज्य श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज की कीर्तन-रिकॉर्डिंग, जिसके विवरण में अपलोडकर्ता ने दुबे खैरा का नाम दिया है। अपलोड २१ मई २०१५; मूल रिकॉर्डिंग की तिथि की पुष्टि शेष है।
दुबे खैरा / खैरादीप बिहार के औरंगाबाद ज़िले में दाउदनगर की बेलवां पंचायत में है। मार्गदर्शन के लिए आयोजक द्वारा साझा ठाकुरबाड़ी का मैप-पिन नीचे उपलब्ध है।
मानचित्र गूगल मैप्स द्वारा उपलब्ध है। यह न खुले तो ऊपर दी गई मार्ग की कड़ी का उपयोग करें।
यात्रा से पहले
यात्रा तय करने से पहले दैनिक कार्यक्रम की घोषणा देखें। पार्किंग, स्थानीय आगमन-व्यवस्था और अन्य आगंतुक जानकारी पुष्टि के बाद जोड़ी जाएगी।
स्थानदुबे खैरा / खैरादीप, बिहार
महायज्ञ २०२७
यज्ञ आयोजन समिति
समिति के सदस्यों का विवरण शीघ्र साझा किया जाएगा।
आयोजक संपर्क
संपर्क की जानकारी
सत्यापित संपर्क-विवरण यहाँ प्रकाशित किए जाएँगे। अभी ईमेल और फ़ोन की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ईमेल
पुष्टि के बाद जोड़ा जाएगा
फ़ोन
पुष्टि के बाद जोड़ा जाएगा
स्रोत और टिप्पणियाँ
जो ज्ञात है, उसका आधार
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यह पृष्ठ आयोजक की स्मृति, गाँव के मुद्रित अभिनन्दन और चुने हुए प्रशासनिक व प्रकाशित स्रोतों को साथ लाता है। स्मृति और दिनांकित अभिलेख का अंतर बनाए रखा गया है।
ग्राम की मौखिक परंपरा। करीब तीन सदियों की बसावट, गोरखपुर क्षेत्र से श्री गंगा दुबे के प्रवास और कृषक विरासत का विवरण आयोजक द्वारा साझा स्थानीय इतिहास पर आधारित है। कृषि-क्षेत्र का पुराना उल्लेख वर्तमान भू-अभिलेख का दावा नहीं है। ग्राम संस्थानों, रामभक्ति और राम जन्मभूमि आंदोलन में सहभागिता का विवरण भी आयोजक द्वारा साझा सामुदायिक स्मृति से लिया गया है।
१९९५ का यज्ञ और २०२७ का आयोजन। पूर्व यज्ञ की अनुष्ठान-अवधि का आधार नीचे दिए गए दिनांक-सूचक पद्य हैं। आयोजक ने पूज्य श्री लक्ष्मीप्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के दिव्य मंगलानुशासन में ३१ जनवरी २०२७ से होने वाले सात दिवसीय श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ, वैदिक यज्ञ, धर्म सभा, प्रवचन और संत समागम की पुष्टि की है। आरम्भ ३१ जनवरी २०२७ को होगा; दिनवार समय की पुष्टि शेष है।
श्रीवचनभूषणम्, पीडीएफ पृष्ठ ३७–३९। गाँव का अभिनन्दन दिनांकित नहीं; चतुर्थ संस्करण पर संवत् २०५३ अंकित है। संस्करण की तिथि को आयोजन की तिथि नहीं माना गया है।
कीर्तन रिकॉर्डिंग, अपलोड २१ मई २०१५। अपलोडकर्ता का विवरण दुबे खैरा का नाम देता है। अपलोड की तारीख आयोजन की तारीख नहीं है; चैनल के आधिकारिक स्वामित्व की पुष्टि नहीं हुई है।
बरगद और यज्ञशाला की कलाकृति प्रतीकात्मक है, वास्तविक गाँव या पूर्व यज्ञ का छायाचित्र नहीं। साझा किए गए शीर्षक-पृष्ठ और अभिनन्दन को मूल डिजिटल पुस्तक के स्वच्छ पृष्ठों से प्रस्तुत किया गया है।